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  सानिया और सैफ अली से क्या प्ररेणा ली जाए
 एस.पी. मित्तल 


सवाल यह नहीं है कि भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से निकाह कर पाकिस्तान चली गई हैं, सवाल यह भी नहीं है कि सानिया मिर्जा अब भारत के बजाए पाकिस्तान की ओर से टेनिस खेलेंगी, सवाल यह भी नहीं है कि सानिया मिर्जा अब शोएब मलिक की बीवी नम्बर दो हैं  और सवाल यह भी नहीं है कि फिल्म अभिनेता सैफ अली खान को पदम भूषण पुरस्कार क्यों मिला है? सवाल यह भी नहीं है कि सैफ अली खान हिन्दू लड़की और फिल्म अभिनेत्री करीना कपूर से निकाह कब करेंगे? अहम सवाल यह है कि सानिया मिर्जा और सैफ अली खान से देश के युवा क्या प्ररेणा लें? पहले बात सानिया मिर्जा की। सानिया मिर्जा ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर टेनिस में जब सफलता अर्जित की तो उन्हें देश के युवाओं खासकर लड़कियों के लिए प्ररेणा का स्त्रोत माना गया। यहां तक कहा गया कि परदे में रहने वाली मुस्लिम लड़कियों को भी सानिया मिर्जा से प्ररेणा लेनी चाहिए। देश का शायद ही कोई राजनेता होगा, जिसने सानिया मिर्जा की प्रशंसा न की हो।
  विभिन्न कंपनियों ने अपना माल बेचने के लिए भी सानिया का भरपूर उपयोग किया। कुछ मुस्लिम कट्टरपन्थियों ने जब टेनिस के कोर्ट पर सानिया की स्कर्ट और टी शर्ट पर फतवे जारी किए तो पूरा देश सानिया के साथ खड़ा हो गया। सब ने कहा कि इस मुस्लिम लड़की ने भारत का नाम रोशन किया है इसलिए उसकी स्कर्ट और टी-शर्ट पर कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए। यानि पूरे देश में सानिया मिर्जा युवाओं की प्ररेणा बन गई, लेकिन अब यह सवाल उठता है कि वर्तमान परिस्थितियों में सानिया मिर्जा से क्या प्ररेणा ली जाए? सानिया मिर्जा ने पाकिस्तान के उस क्रिकेटर शोएब मलिक से निकाह किया है जिस पर अपने ही देश में क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। शोएब मलिक पर मैच फिçक्संग का आरोप और किसी ने नहीं, बल्कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने लगाया है। सानिया अब अपने इस फैसले को जायज ठहरा रही हैं, लेकिन यहां यह सवाल महत्वपूर्ण है कि मुश्किल से आठ माह पहले जब उन्होंने हैदराबाद के ही अपने बचपन के साथी सोहराब से सगाई की थी, तब शोएब मलिक के इश्क के बारे मेें परिवार के लोगों को जानकारी क्यों नहीं दी। खुद शोएब मलिक का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से सानिया के सम्पर्क में हैं। इससे प्रतीत होता है कि जब सानिया ने अपने बचपन के साथी सोहराब से सगाई की तब वे पाकिस्तान के क्रिकेटर शोएब मलिक से इश्क फरमा रही थीं। यूं तो किसी भी समाज के परिवार का अपना मान-सम्मान होता है। मान-समान की ज्यादा फिक्र मुस्लिम समाज में देखी गई है। केन्द्रीय संचार राज्य मन्त्री और अजमेर के सांसद सचिन पायलट और केन्द्रीय मन्त्री फारूख अब्दुला की बेटी सारा के विवाह के उदाहरण बहुत कम मिलेंगे, लेकिन फिल्म स्टार शाहरूख खान और हिन्दू लड़की गौरी के निकाह के उदाहरण आम हैं। हो सकता है कि सानिया मिर्जा को अपने देश का कोई युवा पंसद न आया हो, इसके लिए उन्होंने अपने बचपन के साथी का मोहा भी  त्याग दिया। पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से सानिया मिर्जा का निकाह सफल होता है या नहीं यह आने वाला वक्त ही बतायेगा, लेकिन इतना जरूर है कि इस प्रकरण में सानिया मिर्जा का कैरियर पूरी तरह चौपट हो गया है। अब सानिया मिर्जा भारत की ओर से या पाकिस्तान की ओर से टेनिस खेले, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। किसी भी समाज में निकाह या विवाह के बाद लड़की अपने ससुराल में ही अच्छी लगती है। निकाह के बाद सानिया मिर्जा का भारत में रहने का कोई मतलब नहीं है। वैसे भी मुस्लिम समाज इस बात की कभी इजाजत नहीं देता कि निकाह के बाद लड़की अपने माता-पिता यानि पीहर में रहे। जहां तक शोएब मलिक की पहली पत्नी आयशा का सवाल है तो वह इसी में खुश है कि सानिया मिर्जा शोएब मलिक की बीवी नम्बर दो कहलायेगी।
 समझ में नहीं आता कि फिल्म अभिनेता सैफ अली खान को भारत सरकार की ओर से पदम भूषण पुरस्कार क्यों दिया गया है? सैफ अली खान के पास एक भी कारण ऐसा नहीं है, जिससे देश के युवा प्ररेणा ले सकंे। यदि किसी रेस्टोरंट या होटल में शादी से पहले लड़का-लड़की रात गुजारते हैं तो पुलिस अनैतिक कार्य का आरोप  लगा कर पकड़ लेती है। इस अपराध के समाचार आए दिन दैनिक पत्रों में पढ़ने को मिल जाते हैं , लेकिन फिल्म अभिनेता सैफ अली खान और हिन्दू अभिनेत्री करीना कपूर खुलेआम पूरे देश में होटल, रेस्टोरेंट आदि में एक नहीं कई रातें गुजार रहे हैं। जबकि इन दोनो ने अभी तक विवाह या निकाह नहीं किया।
 बेशर्मी की हद तो तब हो गई, जब गत दिनों राष्ट्रपति भवन में भी सैफ अली खान करीना कपूर को अपने साथ ले गए। पदम भूषण सम्मान प्राप्त करने के बाद जब सामूहिक फोटो लिया गया तो राष्ट्रपति के साथ बड़ी बेशर्मी के साथ सैफ अली और करीना कपूर खड़े थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लिव-इन रिलेशनशिप भले ही अपराध न हो, लेकिन राष्ट्रपति भवन की अपनी मर्यादा है। राष्ट्रपति भवन कोई बाग-बगीचा या पांच सितारा होटल नहीं, जिसमें कोई आशिक अपनी महबूबा को भी ले जाए। राष्ट्रपति भवन में होने वाले सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए बाकायदा निमन्त्रण पत्र दिया जाता है। जिस व्यक्ति को निमन्त्रण पत्र मिलता है,उसकी विस्तृत जांच-पड़ताल होती है और यह भी पता लगाया जाता है कि जिस व्यक्ति को पदमभूषण सम्मान मिल रहा है उससे साथ आने वाले व्यक्ति का क्या रिश्ता है। चूंकि अभी तक सैफ अली और करीना कपूर ने निकाह नहीं किया है इसलिए राष्ट्रपति भवन में दोनों की मौजूदगी राष्ट्रपति भवन की मर्यादाओं पर प्रतिकूल असर डालती है। इस मामले की गम्भीरता तब और बढ़ जाती है, जब राष्ट्रपति के पद पर श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटील जैसी सज्जन महिला विराजमान हैं। भारत सरकार में बैठे जिन अधिकारियों ने सैफ अली खान का चयन पदमभूषण पुरस्कार के लिए किया, उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि चयन का मापदण्ड क्या रहा है? क्या चयन का मापदण्ड यही है कि एक विवाहित मुस्लिम युवक एक हिन्दू लड़की के साथ खुलेआम इश्क फरमा रहा है? शायद चयनकत्ताü सैफ अली खान और करीना कपूर के इश्क को धर्मनिरेपक्षता के साथ जोड़कर देख रहे हैं । कहने को कह सकते है कि भारत में हिन्दू और मुसलमानों के बीच इतना भाईचारा है कि एक हिन्दू लड़की एक विवाहित मुस्लिम लड़के के साथ न केवल खुलेआम घूम रही है बल्कि विवाह या निकाह करने को भी तैयार है।
 भारत एक धर्म निरपेक्ष लोकतान्त्रिक देश है और इस देश का यही दुभाüग्य है कि जिस मुस्लिम लड़की सानिया मिर्जा को देश के नागरिकों ने आंखों की पलकों पर बैठाया, वही लड़की विवाद की स्थिति में पाकिस्तान के युवक से निकाह कर रही है और फिल्म अभिनेत्री करीना कपूर खुलेआम विवाहित मुस्लिम युवक सैफ अली खान के साथ घूम रही है। स्वयं को धर्म निरपेक्ष होने का दावा करने वाले और स्वयं को प्रगतिशील मानने वाले अनेक लोग ऐसे मिल जायेंगे जो सैफ अली और सानिया मिर्जा के कृत्यों को जायज ठहरायेंगे। टीवी चैनलों और अखबारों में धर्म निरपेक्षता का झण्डा उठाना अलग बात है और स्वयं के घर-परिवार में सानिया मिर्जा और सैफ अली से ्रप्ररेणा लेनी की सीख लेना दूसरी बात है। भारत के हिन्दू और मुसलमान को सानिया मिर्जा और सैफ अली से प्ररेणा लेने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि दोनों ही समाज विपरीत परिस्थितियों में रहने के आदी है। हिन्दू और मुसलमान दोनों समाजों की अपनी-अपनी संस्कृति है। इस संस्कृति से जुड़े परिवार कभी भी सानिया मिर्जा और सैफ अली खान को अपनी प्ररेणा का स्त्रोत नहीं मान सकते।