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मूसली पावर की बिक्री में राष्ट्रपति का सहयोग


 दैनिक समाचार पत्र हों, या टीवी न्यूज चैनल। दोनों प्रकार की मीडिया में इन दिनों यौन शक्ति बढ़ाने वाले विज्ञापनों की बाढ़ आयी हुई है। यौन शक्ति बढ़ाने की आड़ में ऐसे-ऐसे विज्ञापन छप और प्रदर्शित हो रहे हैं जो किसी ब्लू फिल्म को भी मात देते हैं । संविधान में महिलाओं के अश्लील प्रदर्शन के लिए कानून बना हुआ है, लेकिन ऐसे अश्लील विज्ञापनों पर अभी तक भी कोई रोक नहीं लगी है। घर-परिवार में दैनिक समाचार पत्र सभी सदस्य पढ़ते हैं, लेकिन यौन शक्ति बढ़ाने वाले विज्ञापनों को देखकार पुरूष सदस्यों को भी शर्म महसूस होती है। यह सही है कि मालिकों को अखबार चलाने के लिए ऐसे विज्ञापन छापने ही पड़ते हैं। किसी भी  कंपनी के विज्ञापन अखबार में छपे यह अखबार मालिक और दवा कंपनी के बीच का मामला है, लेकिन ऐसी दवा कंपनी के विज्ञापन के साथ देश की राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा देवी पाटील का फोटो प्रकाशित हो तो यह बहुत ही शर्मनाक बात है।  ऐसा ही एक विज्ञापन पिछले दिनों प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ। इस विज्ञापन में मूसली पॉवर एक्सट्रा, कुन्नथ फार्मास्युटिकल्स के प्रबंध निदेशक डा. के.सी. अब्राहम को राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटील से व्यवसाय प्रतिभा के लिए पाचहासी राजा अवार्ड प्राप्त करते हुए दिखाया गया है। हो सकता है कि डा. अब्राहम ने यह पुरस्कार अपने व्यवसाय में सफलता के लिए अर्जित किया है, लेकिन राष्ट्रपति से अवार्ड लेने वाला फोटो यदि यौन शक्ति बढ़ाने की दवा की बिक्री के विज्ञापन में उपयोग किया जाए तो इसे किसी भी दृष्टि में उचित नहीं माना जाएगा। देश के राष्ट्रपति का पद न केवल सम्मानीय है बल्कि यह देश के सम्मान से भी जुड़ा हुआ है। डा. के.सी. अब्राहम ने अपने मूसली पॉवर के जिस विज्ञापन में राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटील का फोटो प्रकाशित किया है, उसी विज्ञापन में यह भी लिखा है कि उनकी दवा सौ प्रतिशत सुरक्षित है तथा 45 दिन का कोर्स लेना अनिवार्य है। इसी विज्ञापन में यह भी बताया गया कि मूसली पॉवर के रोजाना दिन में दो बार दो कैप्सूल लेना जरूरी है। हो सकता है कि डा. अब्राहम के कैप्सूलों की मांग देश भर में हो, लेकिन इन कैप्सूलों की बिक्री में यदि देश के राष्ट्रपति के पद का उपयोग किया जाए तो यह कानूनी अपराध भी है।  प्रतिभा देवीसिंह पाटील जिस तरह राष्ट्रपति पद की भूमिका निभा रही है, उसमें वे कभी नहीं चाहेंगी कि ऐसे विज्ञापनों के साथ उनका फोटो प्रकाशित हो। राष्ट्रपति भवन के सचिवालय में बैठे अधिकारियों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे प्रतिभा देवीसिंह पाटील जैसी सम्य महिला के मान-सम्मान की रक्षा करें। डा. अब्राहम का विज्ञापन एक भारतीय महिला का अपमान भी कर रहा है, और यह महिला देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद पर विराजमान है। सरकार ने विज्ञापनों को लेकर भी एक आचार संहिता बना रखी है। इस आचार संहिता का पालन कराने वाले विभाग की भी यह जिम्मेदारी है कि देश के राष्ट्रपति के नाम का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए। डा. अब्राहम के मूसली पॉवर के विज्ञापन के साथ देश के राष्ट्रपति का जो फोटो प्रकाशित किया जा रहा है उस विज्ञापन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए तथा भविष्य में ऐसे इन्तजाम किए जाएं, जिससे ऐसे विज्ञापनों की पुनरावृçत्त न हो। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाकर डा. अब्राहम के विरूद्ध भी कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। भारतीय संवधिान के अन्तर्गत राष्ट्रपति के पद को गरिमापूर्ण बनाया गया है और यदि कोई व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ के खातिर राष्ट्रपति की गरिमा को ठेस पहुंचाता है तो वह दण्ड का भागीदार होना चाहिए। भभक के पाठकों की जानकारी के लिए हम यहां डा. अब्राहम का वह विज्ञापन प्रकाशित कर रहे हैं , जिसमें राष्ट्रपति के फोटो का खुलेआम दुरूपयोग किया गया है।

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