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  कलेक्टर हो तो नवीन महाजन जैसा  
 एस.पी. मित्तल
 सुपर स्टार अमिताभ बच्चन की एक फिल्म का डॉयलाग है- मुंछें हो तो नत्थूलाल जैसी। इस डॉयलाग में अमिताभ बच्चन ने नत्थूलाल से ज्यादा उसकी मूंछों का महत्व बढ़ाया। इसी डॉयलाग की तर्ज पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के युवा अधिकारी नवीन महाजन ने प्रदेश भर में कलेक्टर के पद का मान बढ़ाया है। प्रदेश में सरकार किसी की भी हो, लेकिन नवीन महाजन के कलेक्टर के रौब-रूतबे में कमी नहीं आई। यह महाजन का करिश्मा ही है कि वे पूर्व मुयमन्त्री वसुन्धरा राजे की आंख का तारा रहे तो वर्तमान मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत के तो घर में ही कलेक्टरी कर रहे हैं। नवीन महाजन के पिछले इतिहास पर प्रकाश डालने से पहले यह बताना उचित है कि उन्होंने राजस्व मण्डल राजस्थान के तत्वाधान में आयोजित होने वाली बारहवीं राज्य स्तरीय राजस्व खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन भी अपने जोधपुर शहर में 13 से 15 मार्च के बीच करवा लिया। यह प्रतियोगिता नवीन महाजन के कलेक्टर पद के साथ-साथ चल रही है। गत वर्ष जब वे अजमेर के कलेक्टर थे तो 11 वीं प्रतियोगिता अजमेर में करवाई थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता होना अपने आप में महत्वपूर्ण बात है। महत्वपूर्ण इसलिए भी कि इन दिनों राज्य विधानसभा चल रही है तथा प्रदेश भर में स्कूल और कॉलेज की परीक्षा भी हो रही हैं। ऐसे व्यस्त समय में नवीन महाजन जैसा कलेक्टर ही राजस्व मण्डल की प्रतियोगिता आयोजित करवा सकता है। इस प्रतियोगिता को आयोजित करवाने के लिए राजस्व मण्डल के अध्यक्ष राकेश हूजा ने प्रदेश के कई कलेक्टरों से राय जानी, लेकिन उन्हें सबसे होशियार कलेक्टर नवीन महाजन ही लगे। हालांकि कोई 40 लाख रूपया राजस्व मण्डल इस प्रतियोगिता के लिए देता है लेकिन फिर भी लाखों रूपया इधर-उधर से जुटाया जाता है। यह इधर-उधर का काम नवीन महाजन आसानी से कम लेते हैं । राजस्व मण्डल के सामने एक समस्या यह भी थी कि यदि 31 मार्च से पहले प्रतियोगिता आयोजित नहीं की गई तो 40 लाख का बजट लैप्स हो जाएगा। नवीन महाजन को इस बात की बधाई कि उन्होंने 40 लाख रूपये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले में ही खर्च करवा दिए। यह बात अलग है कि मुख्यमंत्री बार-बार मितव्यता का नारा दे रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रदेश के अन्य कलेक्टरों को नवीन महाजन की कार्य प्रणाली से प्ररेणा लेनी चाहिए। जोधपुर से पहले जब वे अजमेर के कलेक्टर थे तो उन्होंने राष्ट्रीय रोजगार ग्रामीण योजना में इतने अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा दिया कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया। ऐसा नहीं कि नवीन महाजन को अशोक गहलोत के कार्यकाल में ही कार्य कुशलता दिखाने का अवसर मिला हो इससे पहले भी वसुन्धरा राजे के कार्यकाल में भी महाजन अपनी दक्षता अजमेर में प्रकट कर चुके हैं। अजमेर के लोग जानते हैं कि भले ही भाजपा के विधायकों और नेताओं की वसुन्धरा राजे ने न सुनी हो, लेकिन वे नवीन महाजन की बात को मान लेती थीं। तब कांग्रेस के नेताओं ने ही आरोप लगाए थे कि नवीन महाजन कलेक्टर के बजाए भाजपा कार्यकत्ताü के रूप में अजमेर में कार्य कर रहे हंै। यही वजह रही कि जब अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री का पद सम्भाला तो उम्मीद जतायी गई कि नवीन महाजन को जयपुर स्थित सचिवालय में किसी कम प्रभावी पद पद नियुक्त किया जाएगा, लेकिन भाजपा और काग्रेस के नेताओं को तब आpर्य हुआ, जब नवीन महाजन को मुख्यमंत्री के गृह जिले जोधपुर का कलेक्टर बना दिया गया। असल में लोग या राजनीतिक दलों के नेता कुछ भी समझे, लेकिन नवीन महाजन में कलेक्टरी का वो आर्ट है, जिसमें किसी भी मुख्यमंत्री को सन्तुष्ट रखा जा सकता है। भाजपा के राज में भले ही अशोक गहलोत ने अजमेर में राजनीतिक आलोचना की हो और इसी प्रकार अब कांग्रेस के राज में भले ही वसुन्धरा राजे जोधपुर में आलोचना कर रही हो , लेकिन यह दोनों ही नेता नवीन महाजन को एक योग्य और होनहार कलेक्टर मानते हैं। नवीन महाजन की सुझबूझ का पता इससे भी लगता है कि पिछले दिनों जब नरेगा के कार्य के लिए अजमेर को चयनित किया गया तो राष्ट्रीय स्तर पर एक नहीं दो कलेक्टर सम्मानित हुए। हुआ यूं कि केन्द्र सरकार ने वर्तमान जिला कलेक्टर राजेश यादव को समान लेने का निमन्त्रण भेज दिया। इस निमन्त्रण की जानकारी होते ही नवीन महाजन ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मन्त्री डा. सी.पी. जोशी को सन्देश भिजवाया कि हकीकत में यह पुरस्कार उन्हें मिलना चाहिए क्योंकि नरेगा के कार्य की जिस रिपोर्ट के आधार पर अजमेर जिले का चयन हुआ है, उस रिपोर्ट के समय वे यानि नवीन महाजन अजमेर के कलेक्टर थे। चूंकि यह सन्देश प्रभावी तरीके से पहुंचाया गया इसलिए भारत सरकार ने अजमेर के कलेक्टर राजेश यादव के साथ-साथ नवीन महाजन को  दिल्ली बुलवाया और एक पुरस्कार को दो कलेक्टर के हाथों में सोप दिया। यदि नवीन महाजन की जागरूकता नहीं होती तो राजेश यादव अकेले ही नरेगा का सम्मान प्राप्त कर लेते। इस कार्यवाही से नवीन महाजन ने यह भी दर्शा दिया कि अजमेर को जो सम्मान मिला, वह वर्तमान कलेक्टर राजेश यादव के कारण नहीं बल्कि नवीन महाजन के कारण मिला है। इन दिनों जोधपुर में रहकर नवीन महाजन जिस प्रकार अपनी कार्य कुशलता दिखा रहे हैं, उससे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उसी तरह प्रभावित हैं जिस प्रकार पूर्व में वसुन्धरा राजे अजमेर में नवीन महाजन से प्रभावित हुई थीं।