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  सीएम साहब यह क्या हो रहा है
आदरणीय अशोक जी,
नमस्कार
 मुझे उम्मीद है कि आप महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री अशोक चव्हाण की तरह मुख्यमंत्री की जिम्मदारी नहीं निभा रहे हैं।  सी-लिंक के उदघाटन समारोह में सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के पहुंचने की जानकारी सरकारी विज्ञापन के जरिए अखबारों में छप जाने के बाद भी अशोक चव्हाण ने कह दिया कि उन्होंने अखबार ही नहीं पढे, लेकिन आप महाराष्ट्र वाले अशोक नहीं बल्कि राजस्थान वाले अशोक हैं और प्रदेश के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र पढ़ते हैं। आपने देखा होगा कि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र भास्कर और पत्रिका आपको न तो ईमानदार, न संवेदनशील, न पारदर्शी और न ही जनता का मुख्यमन्त्री मान रहे हैं । ये बड़े अखबार वाले आपको कुछ भी माने, लेकिन मैं अभी भी आपको एक संवेदनशील, ईमानदार और पारदर्शी सरकार चलाने वाला मुख्यमन्त्री मान रहा हूं इसीलिए भास्कर और पत्रिका में छपी प्रमुख खबरों की कटिंग को स्कैन कराकर एक बार फिर भभक में छाप कर आपके समक्ष सवाल रख रहा हूं कि सीएम साहब यह क्या हो रहा है? मुझे इस बात का आभास है कि पत्रिका और भास्कर में छपी खबरों को पढ़ने के बाद आप अपनी ओर से कोई सफाई नहीं देंगे, लेकिन आप यह भी अच्छी तरह समझ लें, कि ऐसी खबरों के छपने से आपकी सरकार पर सवालिया निशान तो लगते ही हैं। आपकी सुविधा के लिए भास्कर और पत्रिका की प्रमुख खबरों को एक साथ प्रकाशित कर आपको आकलन करने का अवसर तो मैं दे ही रहा हूं। आप स्वयं देखें कि इन खबरों में आपके और आपकी सरकार के बारे में क्या-क्या लिख दिया गया है। आप स्वयं को संवेदनशील मुख्यमंत्री मानते है, लेकिन पिछले दिनों जब कुछ प्रदर्शनकारियों पर जयपुर में पुलिस ने लाठी चार्ज किया तो राजस्थान पत्रिका के प्रथम पृष्ठ पर भुवनेश जैन ने संपादक की हैसियत से एक अग्र लेख लिखा और आपकी सरकार को ढीठ तक कह दिया। अब आप ही बताएं कि क्या अशोक गहलोत की सरकार ढीठ हो गई है। इसी प्रकार पत्रिका के 23 मार्च के अंक में प्रथम पृष्ठ पर लीड ही आपको केन्द्र बनाकर लिखी गई। इस खबर से ऐसा आभास होता है कि नरेगा में हुए भ्रष्टाचार पर पंचायती राज मन्त्री भरतसिंह तो कार्यवाही करना चाहते हैं , लेकिन आप नहीं। पत्रिका ने वह गोपनीय टिप्पणी भी प्रकाशित कर दी जो भरतसिंह द्वारा आपको लिखी गई थी। इस खबर को पढ़ने के बाद यह सवाल उठता है कि ईमानदार कहे जाने वाले अशोक गहलोत क्या भ्रष्ट अफसरशाही हो बचा रहे हैं? महत्वपूर्ण बात तो यह है कि जो फाइल भरतसिंह की ओर आपको भेजी गई, उसका पता भी नहीं लग रहा। पूर्व मुख्यमन्त्री वसुन्धरा राजे से जुड़े दीनदयाल ट्रस्ट की फाइल गायब होने पर आपने भी नाराजगी जताई, लेकिन अब तो ऐसा प्रतीत होता है कि पंचायती राज मन्त्री भरतसिंह वाली फाइल आपके मुख्यमन्त्री सचिवालय में ही इधर-उधर पड़ी हुई है। अशोक जी आप राजस्थान पत्रिका को अपनी सफाई दे या नहीं, लेकिन जनता आपसे यह सवाल जरूर पुछेगी कि पूर्व मुख्यमंत्त्री वसुन्धरा राजे और आप में क्या कोई फर्क नहीं रहा? पिछले विधानसभा के चुनाव में आमसभाओं में आपने भ्रष्टाचार को भी मुद्दा बनाया था। क्या आप नहीं चाहेंगे कि जनता में पिछली और वर्तमान सरकार के बीच फर्क बना रहे? यह सही है कि करौली के कलेक्टर ने कथित रूप से जो भ्रष्टाचार किया उसमें आपका कोई शेयर नहीं है, लेकिन ईमानदार मुख्यमन्त्री के नाते आपकी यह जिम्मेदारी है कि आप भ्रष्ट अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही तो करें। और आप तो पिछले सवा साल से बराबर कहते आ रहे हैं  कि भ्रष्टाचारियों की जगह सेन्ट्रल जेल है। और जब भ्रष्टाचारी की पहचान आपकी सरकार के एक मन्त्री ही कर रहे हैं तो फिर आप जांच को सार्वजनिक क्यों नहीं  कर रहे?
 आपको याद होगा कि दो माह पहले ही अजमेर के जिला कलेक्टर राजेश यादव और जोधपुर के जिला कलेक्टर नवीन महाजन को प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने पुरस्कृत किया। पंचायती राज विभाग की ओर से यह दावा किया गया कि इन दोनों कलेक्टरों के अजमेर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के अन्तर्गत उल्लेखनीय कार्य किया। स्वाभाविक है कि राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने के लिए राज्य सरकार अनुशंसा करती है। आपके अधिकारियों ने विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद ही इन दोनों अधिकारियों का नाम भारत सरकार को प्रस्तावित किया होगा, लेकिन गत दिनों जब रोजगार एवं सूचना का अधिकार अभियान से जुड़ी नेत्री अरूणा राय आप से मिलीं तो उन्होंने अजमेर जिले में चले नरेगा कार्यक्रम की पोल खोल कर रख दी। भभक में जो कटिंग प्रकाशित की गई है उसमें दैनिक भास्कर के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित खबर भी है। इस खबर में अरूणा राय की सोशल ऑडिट को आधार बनाकर यह बताया गया कि अजमेर जिले की जवाजा पंचायत समिति की मालातों की बैर ग्राम पंचायत में नरेगा के कामों में एक करोड़ 30 लाख रूपए का गबन हुआ है। अरूणा राय ने अपनी सोशल ऑडिट की रिपोर्ट और किसी को नहीं बल्कि आपके हाथों में दी। यहां फिर सवाल उठता है कि सीएम साहब यह क्या हो रहा है? दो महीने पहले जिन कलेक्टरों को उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया, उनके जिले में सिर्फ एक ग्राम पंचायत में 1 करोड़ 30 लाख रूपए का गबन। अच्छा हुआ कि अरूणा राय ने अजमेर जिले की दूसरी ग्राम पंचायतों की सोशल ऑडिट की रिपोर्ट आपको नहीं दी। यदि अरूणा राय दूसरी ग्राम पंचायतों की सोशल ऑडिट की रिपोर्ट आपको दे देती तो अकेले अजमेर जिले में आपकी सरकार का सत्यानाश हो जाता। मुझे नहीं पता कि अरूणा राय की सोशल ऑडिट की रिपोर्ट आपने पढ़ी या रद्दी की टोकरी में फेंक दी, लेकिन जनता को यह तो बताना ही होगा कि अरूणा राय झूठी है या वो कलेक्टर जो राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुए हैं । आपको अरूणा राय और दोनों कलेक्टरों में से एक पक्ष को तो ईमानदार बताना ही पड़ेगा। मुझे पता है कि इस मुद्दे को लेकर भी आप बहुत विचलित होंगे। यदि आप अपने कलेक्टरों को ईमानदार मनाते है तो अरूणा राय को झूठा कहना ही पड़ेगा। और यदि अरूणा राय की ऑडिट रिपोर्ट सही तो फिर दोनों कलेक्टरों को क्या होगा।
 अशोक जी, आप आईपीएस बने मामू शीर्षक वाली पत्रिका की खबर भी देख रहे होंगे। जिन आईपीएस अफसरों के भरोसे आप प्रदेश में कानून व्यवस्था कायम रखने का दावा करते हैं, उन्हीं में से दो आईपीएस ऐसे भी है जो एक मामूली से ठग के शिकार हो जाते हैं। एक ठग सीधे एक आईपीएस अफसर को फोन कर ठग लेता है इससे आप अन्दाजा लगा सकते हैं कि आईपीएस अफसर कितने योग्य है। गम्भीर बात तो यह है कि अब इस पूरे मामले में लीपापोती हो रही है। जबकि होना तो यह चाहिए कि ऐसे आईपीएस अफसरों को फील्ड से हटाकर उच्च प्रशिक्षण के लिए भेज दिया जाए। चूंकि यह खबर पत्रिका जैसे बड़े अखबार में प्रथम पृष्ठ पर छपी है इसीलिए आपने पढ़ी ही होगी। यदि व्यस्तता के कारण आपने नहीं पढ़ी तो मेरा आग्रह है कि भभक में छपी कटिंग को अवश्य पढ़ ले और आम जनता को यह बताएं कि आप इन आईपीएस अफसरों के भरोसे किस प्रकार से सरकार को चला रहे हैं। आपकी सरकार की कितनी दयनीन स्थिति हो गई है इसका अन्दाजा भास्कर में छपी खबर से भी लगता है। विधानसभा में कांग्रेस के मन्त्री और विधायक ही सरकार पर हमले कर रहे हैं। क्या इन मन्त्रियों और विधायकों को पता नहीं कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में ही कांग्रेस की सरकार चल रही है।
 अशोक जी, हो सकता है कि प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्र आपसे नाराज हो, लेकिन इन पत्रों में इन दिनों जो कुछ भी छप रहा है वह राजस्थान में कांग्रेस की सरकार और आपके लिए हितकारी नहीं है। आप माने या नहीं, प्रदेश की जनता आपको अभी भी एक अच्छा और संवेदनशील मुख्यमन्त्री मनाती है, लेकिन आप स्वयं बताए कि प्रदेश की जनता इन खबरों को पढ़ने के बाद आपको कब तक अच्छा मुख्यमन्त्री मानती रहे।

प्रतिष्ठा में,                                                                                                                      भवदीय
अशोक जी गहलोत मुख्यमंत्री                                                                          एस.पी. मित्तल
राजस्थान सरकार जयपुर                                                                          editor@bhabhak.com