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क्या फर्क है शशि थरूर और ललित मोदी
में
एस.पी. मित्तल

आईपीएल के कमिश्नर ललित मोदी ने केन्द्रीय विदेश राज्यमन्त्री शशि
थरूर पर स्पोटर्स वल्र्ड में हिस्सेदारी को लेकर जो हमला किया है,
उसका मकसद राजनीतिक न होकर व्यक्तिगत चरित्र से है। ललित मोदी का
मकसद शशि थरूर के विदेश मन्त्री के पद को नुकसान पहुचाना नहीं, बल्कि
उनके चरित्र की पोल खोलना है। ललित मोदी के हमले के बाद शशि थरूर को
सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना पड़ा की आईपीएल चार में शामिल होने
वाली कोच्चि टीम का मालिकाना हक उनकी दोस्त सुनन्दा पुष्कर के पास भी
है। यदि ललित मोदी स्पोटर्स व्लर्ड के हिस्सेदारों के नाम उजागर नहीं
करते तो शशि थरूर को सार्वजनिक रूप से अपनी महिला मित्र का नाम भी
उजागर नहीं करना पड़ता। हो सकता है कि शशि थरूर पर व्यक्तिगत हमला कर
ललित मोदी अपने मकसद में कामयाब हो गए हो , लेकिन सवाल उठता है कि
क्या इस हमले का नैतिक अधिकार ललित मोदी को है? सब जानते हैं कि
राजस्थान में जब भाजपा की सरकार थी तो ललित मोदी के चरित्र को लेकर
चर्चाएं आम थीं। यहां तक आरोप लगे कि भाजपा की सरकार में सबसे ज्यादा
ललित मोदी की चलती है। तब कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के पद पर
बैठे अशोक गहलोत ने साफ कहा कि राजस्थान में भाजपा की सरकार को
मुम्बई में बैठे सत्ता के दलाल चला रहे हैं। आईपीएस और आईएएस
अधिकारियों ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे से ललित मोदी
के व्यवहार की शिकायतें की। ऐसी चर्चाएं गोपनीय नहीं, सार्वजनिक रूप
से होई , लेकिन ललित मोदी ने बेशर्मी ओढ़े रखी। आज जब ललित मोदी
आईपीएल तीन का आयोजन कर रहे हैं, तब भी रात के समय होने वाली पांच
सितारा महफिलों में खुलेआम शिरकत करते हैं। इन महफिलों में शराब और
शबाब का दौर चलता रहता है। चूंकि आईपीएल की ऐसी पाटिया अश्लील
होती हैं इसलिए एम टीवी पर ही इनका प्रसारण होता है। ललित मोदी को
शशि थरूर पर चारित्रिक हमला करने से पहले अपने गिरेबां में झांकना
चाहिए था। शशि थरूर ने तो सार्वजनिक तौर पर सुनन्दा पुष्कर को अपना
दोस्त स्वीकार कर लिया और हो सकता कि आगे चलकर पुष्कर सुनन्दा से शशि
थरूर विवाह भी कर लें, लेकिन क्या ललित मोदी शशि थरूर की तरह हिम्मत
दिखा पायेंगे? ललित मोदी का नाम भी कई महिलाओं से जुड़ता रहा है, क्या
ललित मोदी ऐसी महिलाओं को सार्वजनिक तौर अपना दोस्त स्वीकार कर
लेंगे? असल में ललित मोदी ने मधु मçक्खयों के छोट में हाथ डाल दिया
है। आने वाला समय ललित मोदी के लिए कठिन होगा।
ललित
मोदी को यह समझना चाहिए कि आईपीएल संस्था उनकी घर की दुकान नहीं है।
आईपीएल का संचालन बीसीसीआई के अन्तर्गत होता है।
वैसे भी ललित मोदी ने आईपीएल का आयोजन कर भारत में क्रिकेट का
सत्यानाश करवा दिया है। आज भले ही आईपीएल मैचों के कारण खूब माल
बटोरा जा रहा हो, लेकिन इससे क्रिकेट के खेल को नुकसान हुआ है। ललित
मोदी ने आईपीएल के मैचों में सिर्फ क्रिकेट का खेल न कर, अनेक
षडयन्त्र कर लिए हैं । जिस तरह से आईपीएल के मैचों के दौरान स्टेडियम
में ही चीयर्स गल्र्स का नंगा नाच और शराब का वितरण होता है, उससे
क्रिकेट के खेल पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ललित मोदी रात को होने वाली
पांच सितारा पार्टियों में भले ही फिल्मी अभिनेत्रियों के साथ डांस
कर लें, लेकिन इसका असर खेल जगत पर बुरा ही पड़ेगा। आम तौर पर खेलों
को मादक पदार्थों से दूर रखा जाता है, लेकिन आईपीएल की पार्टियों में
खिलाड़ी भी खुलेआम शराब का सेवन करते हैं। आईपीएल दो का आयोजन दक्षिण
अफ्रीका में हो चुका है, लेकिन ललित मोदी ने आईपीएल- एक और आईपीएल
-तीन में जो मौज मस्ती हिन्दुस्तान में की, वो दक्षिण अफ्रीका में
नहीं हुई। भारत के क्रिकेट प्रेमी भी धन्य हैं, जो आईपीएल मैचों पर
पैसा लुटा रहे हैं। असल में आईपीएल मैच क्रिकेट का खेल न होकर
लुट-खसोट का धंधा हो गया है जिसमें ललित मोदी से लेकर क्रिकेट के
खिलाड़ी और बहुर्राष्ट्रीय कंपनिया शामिल हैं। |
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