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हुसैन
अब बनाए भारत जैसी पेंटिग
एस.पी. मित्तल
सवाल यह नहीं है कि कतर की नागरिकता मिलने के बाद मशहूर
चित्रकार एम.एफ. हुसैन ने भारत की नागरिकता लौटा दी है। सवाल
यह है कि एम.एफ. हुसैन जिस स्वतन्त्रता के साथ भारत में रहकर
हिन्दू देवी-देवताओं के नग्न चित्र बनाते रहे, क्या उसी
प्रकार आजादी के साथ कतर में रहकर वहां के धर्मगुरूओं और
पैगबरों के चित्र बना पायेंगे? चित्रकारी यानि कला के
क्षेत्र में एम.एफ.हुसैन का नाम दुनियाभर में मशहूर है।
हुसैन की पेंटिग करोड़ों रूपयों में बिकी है और आज 95 वर्ष की
उम्र में भी हुसैन की बनाई पेंटिग की अन्तर्राष्ट्रीय बाजार
में मांग है। यूं कहने को तो हुसैन भारत को अपनी मातृभूमि
मानते हैं, लेकिन उन्होंने भारतीय संस्कृति के देवी-देवता
गणेश, शिव-पार्वती, सरस्वती, लक्ष्मी, आदि के अश्लील चित्र
बनाने में कभी शर्म महसूस नहीं की। ऐसी अश्लील चित्रकारी पर
उनका भारत में विरोध भी हुआ। लोगों की धार्मिक भावना को ठेस
पहुंचाने के विरोध में हुसैन के खिलाफ अपराधिक मामले भी दर्ज
हुए। जब-जब भी हुसैन का विरोध हुआ तो वे भारत छोड़कर
इंग्लैण्ड, अमेरिका, फ्रांस, दुबई आदि देशों में चले गए।
हुसैन पिछले कई माह से स्वयं ही कतर में निर्वासित जीवन
व्यतीत कर रहे थे। भारत में आम लोगों में भले ही हुसैन के
प्रति कितना भी गुस्सा हो, लेकिन केन्द्र की धर्म निरपेक्ष
सरकार ने हमेशा हुसैन की सुरक्षा के इतंजाम किए, इतना ही
नहीं स्वयं को धर्म निरपेक्ष का दावा करने वाले नेता और
अभिनेता हुसैन के समर्थन खड़े होते रहे, लेकिन इसके बावजूद भी
हुसैन ने भारत छोड़ने का मन बना ही लिया। कतर जैसे मुस्लिम
देश ने हुसैन को नागरिकता भी प्रदान कर दी। कतर की नागकिरता
मिलते ही हुसैन ने पिछले दिनों कतर में ही भारतीय दूतावास
में जाकर भारत की नागरिकता का पासपोर्ट लौटा दिया। आज की
स्थिति में एम.एफ.हुसैन भारत के बजाए कतर के नागरिक हैं। कतर
की नागरिकता के लिए हुसैन ने वैधानिक रूप से आवेदन किया और
वहां की सरकार ने अपने देश के नियमों के अन्तर्गत हुसैन को
नागरिकता प्रदान कर दी। चूंकि कतर ने अपने देश के कानून के
तहत नागरिकता प्रदान की है, इसलिए यह सवाल उठता है कि क्या
एम.एफ.हुसैन भारत की तरह कतर में स्वतन्त्रता के साथ
चित्रकारी कर लेंगे? विदेश खासकर मुस्लिम देश की जानकारी
रखने वालों को पता है कि किसी भी मुस्लिम देश में अपने धर्म
के अनुरूप कानून बनाए जाते है। वहां भारत की तरह नहीं धर्म
निरपेक्षता की आड़ में आप चाहे जो करे, ऐसा चल नहीं सकता।
चूंकि मुस्लिम देश का कानून धर्म से जुड़ा होता है कि इसलिए
इस बात की जरा सी भी स्वतन्त्रता नहीं होती कि आप लोगों की
धार्मिक भावना का मजाक उड़ाएं। यदि कोई व्यक्ति लोगों की
धार्मिक भावनाओं का मजाक उड़ाता है तो कानून के अन्तर्गत उससे
फांसी तक की सजा दी जा सकती है।
आज भले ही एम.एफ. हुसैन भारत छोड़ कर चले गए हो , लेकिन मेरी
मुलाकात हुसैन से अजमेर के मेयो कालेज में कोई 15 वर्ष पूर्व
हुई थी। तब मैंने एक राष्ट्रीय दैनिक के लिए उनका इंटरव्यू
लिया। मुझे याद है तब वे भारत को दुनिया का सबसे अच्छा
राष्ट्र मान रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत की
खूबी यही है कि इसमें हर समय धर्म निरपेक्षता की खुशबू आती
है। तब अपने इंटरव्यू में उन्होने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय
बाजार में जो माल बिकता है, वही मैं बनाता हूं। भारतीय
देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाने के सम्बंध में तब हुसैन
का कहना था कि मेरा नज़रिया और मन एकदम साफ-सुथरा है, लेकिन
लोगों का नज़रिया दोषपूर्ण हो जाता है। हुसैन अपने बचाव में
आज भी यही तर्क देते हैं । हो सकता है कि हुसैन के तर्क सही
हो, लेकिन अहम सवाल यही है कि जिन तर्कों पर वे बराबर भारतीय
देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाते रहे, क्या उन्हीं
तर्कों पर कतर में मुस्लिम धर्मगुरूओं और पैगम्बरों के
चित्र बना पायेंगे? इसमें कोई दो राय नहीं कि हुसैन को
नागरिकता देकर कतर की सरकार ने सुझबूझ पूर्ण कार्य किया है।
कला के क्षेत्र में हुसैन का दुनियाभर में नाम है और अब ऐसा
मशहूर व्यक्ति कतर जैसे छोटे देश का नागरिक है। ऐसे में कतर
की अपनी पहचान अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में होनी ही है। अब
हुसैन कतर में बैठकर जो पेंटिग बनायेंगे वो इंग्लैण्ड,
अमेरिका जैसे बड़ देशों में बिकेंगी, लेकिन इसके साथ ही कतर
की सरकार को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। एम.एफ.हुसैन जब
भारत के नागरिक थे तो उन्होंने धर्मनिरपेक्षता की आड़ में भले
ही भारतीय देवी-देवताओं की कितनी भी अश्लील पेंटिग बना ली,
लेकिन अब यदि वे ऐसी ही अश्लील पेंटिग बनाते है तो विरोध
पहले से उग्र हो सकता है, क्योंकि अब यह माना जाएगा कि एक
मुस्लिम देश का नागरिक भारतीय देवी-देवताओं के अश्लील चित्र
बना रहा है। एम.एफ. हुसैन को भी इस बात का ध्यान रखना होगा
कि जिस भारतवर्ष ने दुनियाभर में उनका नाम रोशन किया, उसकी
संस्कृति के साथ छेड़छाड न की जाए। हुसैन भारतीय संस्कृति के
साथ ही नहीं बल्कि कतर की मुस्लिम संस्कृति के साथ भी छेड़छाड
न करें।
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