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डा. बाहेती मुख्यमन्त्री के
विश्वासपात्र तो हैं
अजमेर नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष और पुष्कर के विधायक रहे डा.
श्रीगोपाल बाहेती को जिला स्तरीय बीस सूत्रीय कार्यक्रम
क्रियान्वयन समिति का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। यह पहला अवसर
है जब जिला स्तर पर इस प्रकार की राजनीतिक नियुक्तियां प्रदेश भर
में हुई है। डा. बाहेती को मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत का
विश्वासपात्र माना जाता है, इसीलिए राजीतिक हलकों में यह उम्मीद
जाई जा रही थी कि डा. बाहेती को किसी राज्य स्तरीय संस्था का
मुखिया बनाकर राज्यमन्त्री का दर्जा दिया जाएगा। लेकिन जिला स्तरीय
समिति का उपाध्यक्ष बनाकर मुख्यमन्त्री ने इस बात के संकेत दे
दिए हैं कि उनके समर्थकों को फिलहाल इसी में सब्र करना पड़ेगा।
राज्य भर में ऐसी जो नियुक्तियां हुई है उसमें अधिकांश
मुख्यमन्त्री गहलोत के विश्वासपात्र हैं । ऐसा नहीं कि
मुख्यमन्त्री अपने विश्वासपात्रों को लाभ नहीं देना चाहते, लेकिन
इस बार प्रदेश में राजनीतिक हालात बदले हुए हैं। गहलोत जब पहली बार
मुख्यमन्त्री बने थे तो कांग्रेस पार्टी में उनके नेतृत्व को
चुनौती देने वाला कोई नहीं था। कांग्रेस हाई कमान भी चाहता था कि
गहलोत ही राजस्थान में कांग्रेस के सर्वमान्य नेता बन जाएं, इसीलिए
उन्हें खुली छूट दी गई। यही कारण रहा कि तब डा. बाहेती अजमेर नगर
सुधार न्यास के अध्यक्ष बन गए और बाद में टिकट मिलने पर पुष्कर से
विधायक भी चुने गए। हालांकि अब डा. बाहेती भी पिछला विधानसभा का
चुनाव हार गए और दोबारा मुख्यमन्त्री बनने के बाद अशोक गहलोत के
समक्ष पहले वाले हालात नहीं है। राजस्थान कांग्रेस में ऐसे अनेक
नेता हैं जो कांग्रेस आलाकमान के निकट माने जाते है। ऐसी स्थिति
में अशोक गहलोत पहले की तरह अपने विश्वासपात्रों को लाभ के पद नहीं
दे सकते। अशोक गहलोत इन दिनों जिन राजनीतिक हालातों में
मुख्यमन्त्री का काम कर रहे हैं उन्हें समझते हुए ही गहलोत ने अपने
विश्वासपात्रों को जिला स्तरीय बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन
समिति का उपाध्यक्ष मनोनीत कर दिया है। गहलोत ने अपने
विश्वासपात्रों को यह संकेत दे दिया कि वर्तमान हालातों में ऐसे ही
पद से सन्तुष्ट होना पड़ेगा। डा. बाहेती जैसे विश्वासपात्र भी समझते
है कि बदली हुई परिस्थितियों में इससे ज्यादा मिलना मुश्किल है,
लेकिन उनके लिए यह सन्तोष की बात है कि वे मुख्यमन्त्री के
विश्वासपात्र बने हुए हैं ।
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