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संघ,
भाजपा और मुसलमान
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ परिवार के सदस्य भाजपा की जब भी
कोई रणनीति तय होती है तो उसमें मुसलमानों की स्थिति जरूर
शामिल होती है। यही कारण रहा कि हाल ही में इन्दौर में हुई
भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन
गडकरी ने अयोध्या में राम मन्दिर बनवाने के
साथ-साथ मस्जिद का निर्माण करवाने की बाही। गडकरी कोई भी
दावा कर ले कि उसका भाजपा की राजनीति से कोई सरोकार नहीं है,
लेकिन भाजपा की राजनीति में संघ का हमेशा दखल रहा है। भाजपा
का कोई भी राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, लेकिन वह संघ के इशारे पर
ही बोलता है। किसी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष में इतनी हिम्मत
नहीं कि वह संघ की विचारधारा के खिलाफ रणनीति तय कर ले। और
फिर नितिन गडकरी तो संघ के ही हैं। नितिन गडकरी के बयान के
तुरन्त बाद संघ परिवार के दूसरे सदस्य विश्वहिन्दू परिषद के
शीर्ष नेता प्रवीण भाई तोगडिया ने साफ कर दिया कि अयोध्या
में सिर्फ पहले राम मन्दिर ही बनेगा। तोगड़िया का यह बयान भी
संघ के इशारे पर ही जारी हुआ है। असल में भाजपा के सामने
सबसे बड़ी समस्या उसके दोहरे चरित्र की ही है। भाजपा नेताओं
की यह मजबूरी है कि उन्हें हर बार अपना दोहरा चरित्र दिखाना
पड़ता है। सवाल उठता है कि जब नितिन गडकरी ने अयोध्या में राम
मन्दिर बनवाने के साथ-साथ मस्जिद बनाने की बात भी कह दी थी
तो फिर प्रवीण भाई तोगçड़या को बयान देने की क्या जरूरत रही?
संघ के नेता तो यह कहकर पीछे हट जायेंगे कि भाजपा की राजनीति
से हमारा कोई सरोकार नहीं है, लेकिन संघ के नेताओं को यह
स्पष्ट करना चाहिए कि क्या नितिन गडकरी और प्रवीण भाई
तोगडिया अपनी मर्जी से बयान जारी कर देते हैं? असल में संघ
हो या भाजपा अभी तक भी मुसलमानों के बारे में एक लाइन नहीं
अपना पाए हैं। यूं कहने को तो संघ हिन्दू राष्ट्र की
परिकल्पना लेकर चलता है, लेकिन जब चुनाव में वोट की बात आती
है तो मुसलमानों को खुश करने की रणनीति अपनायी जाती है। इस
दोहरे चरित्र के कारण ही भाजपा को लगातार नुकसान हो रहा है।
संघ वाले लालकृष्ण आडवाणी को कितना भी अयोग्य माने, लेकिन इस
सबकी जिम्मेदारी संघ के रणनीतिकारों की भी है। यदि संघ को
हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना पूरी करनी है तो फिर नितिन
गडकरी से अयोध्या में मन्दिर के साथ मस्जिद बनवाने का बयान
क्यों दिलवाया गया? और यदि अयोध्या में मन्दिर और मस्जिद
दोनों बनवाने है तो प्रवीण भाई तोगड़िया से विपरीत बयान
क्यों जारी करवाया? नितिन गडकरी और प्रवीण भाई तोगड़िया के
बयानों से लगता है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सिनेमा हॉल
में दर्शकों को एक टिकट में दो फिल्म दिखा रहा है। दर्शक
यानि देश का मतदाता यह समझ ही नहीं रहा कि वह हिन्दू राष्ट्र
की परिकल्पना वाली फिल्म दिख रहा या फिर धर्म निरपेक्ष वाले
राष्ट्र की। ऐसा नहीं कि हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना वाली
फिल्म में मुसलमानों का कोई स्थान नहीं है। संघ भी यह मानता
है कि आज भारत में मुसलमानों की जितनी आबादी हो गई है, उसमें
मुसलमानों की उपेक्षा नहीं की जा सकती। आज उस हिन्दू राष्ट्र
की कल्पना नहीं हो सकती, जिसमें मुसलमान न रहे, लेकिन भाजपा
और संघ को सिर्फ यह दिखाना है कि वह हिन्दू राष्ट्र की
परिकल्पना वाली पार्टी हैं, लेकिन हर बार इस परिकल्पना में
संघ के रणपीतिकारों से चूक हो जाती है। यही कारण रहता है कि
चुनावों में भाजपा को न हिन्दुओं और न मुसलमानों के वोट
मिलते हैं। संघ ने लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं को दरकिनार
कर नितिन गडकरी जैसे जूनियर नेता को भाजपा का राष्ट्रीय
अध्यक्ष बनवा दिया, लेकिन एक टिकट में दो फिल्म दिखाने का
कारनामा बन्द नहीं किया है। संघ जब तक एक टिकट में एक फिल्म
ही नहीं दिखायेगा, तब तक कोई एक लाइन तय नहीं होगी। आगामी
दिनों में भले ही कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हों,
लेकिन लोकसभा के चुनाव में अभी चार वर्ष बाकी हैं। ऐसे में
संघ के रणनीतिकारों को चाहिए कि वे कोई एक दिशा तय कर लें और
उनके परिवार के सभी सदस्य उसी लाइन पर काम करें।
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