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  अजमेर के साथ समान अधिकार कानून का उल्लंघन
जयपुर और जोधपुर में रोजाना तथा अजमेर में चार दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई क्यों?


श्री जगदीश चन्द्र जी भल्ला 
मुख्य न्यायाधीश- राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर- जोधपुर


 राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष भभक समाचार पत्र आम नागरिक के अधिकारों से सम्बंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दा प्रस्तुत कर रहा है। भारतीय संविधान में भी साफ लिखा है कि राज्य में रहने वाले भारतीय नागरिक को समान अधिकार है। सरकार सीमित साधनों या अन्य किसी कारण से राज्य के नागरिक के साथ भेदभाव नहीं कर सकती। यानि ऐसा नहीं हो सकता कि राज्य की राजधानी के नागरिकों को अधिक सुविधायें मिले और अजमेर जैसे छोटे शहर के नागरिकों को सुविधायें कम मिले।
 चूंकि इन दिनों गर्मी के मौसम में पेयजल की भीषण किल्लत है इसलिए अजमेर के नागरिकों की ओर से भभक पेयजल के समान वितरण का मुद्दा राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित में रख रहा है। इसी खबर को आधार मानकर जनहित याचिका स्वीकार की जाए। संविधान के अनुसार राज्य की खनिज संपदा व अन्य स्त्रोतों पर नागरिकों का समान अधिकार है। कानून के इसी मापदण्ड के अनुरूप टोंक जिले में स्थापित बीसलपुर बांध के पानी को जयपुर भी ले जाया जा रहा है। हालांकि अजमेर के नागरिकों ने बीसलपुर बांध के पानी को जयपुर ले जाने का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने संविधान में प्रदत्त समान अधिकारों का हवाला देते हुए जयपुर पानी ले जाने को जायज ठहरा दिया। यह सही भी है कि यदि जयपुर के लोग पानी के अभाव में दम तोड़ रहे हैं तो बीसलपुर बांध का पानी जयपुर ले जाना चाहिए। लेकिन जयपुर और अजमेर में पानी के वितरण में भेदभाव हो तो यह भारतीय संविधान में उल्लेखित समान अधिकार का उल्लंघन है। राजस्थान उच्च न्यायालय की  जयपुर खण्ड पीठ के समक्ष यह सर्वविदित है कि जयपुर महानगर में नागरिकों को प्रतिदिन तथा कई स्थानों पर दिन में दो बार पेयजल की सप्लाई इन दिनों सरलता के साथ की जा रही है। चूंकि जयपुर राजस्थान की राजधानी है इसलिए वहां पेयजल का वितरण का खास  ख्याल रखा जाता है। राजधानी के नागरिकों को रोजाना या एक दिन में दो बार पेयजल की सप्लाई करने के लिए बीसलपुर बांध से लाखों गैलन पानी प्रतिदिन लिया जा रहा है। बीसलपुर बांध से जयपुर शहर तक पानी ले जाने के लिए सरकार ने अरबों रूपया खर्च कर पाइप लाइन बिछायी है। एक ओर जहां जयपुर के नागरिकों को प्रतिदिन पेयजल की सप्लाई हो रही है वहीं दूसरी ओर इसी राज्य के अजमेर शहर के नागरिकों को तीन-चार दिन में एक बार मात्र एक घंटे के लिए पेयजल की सप्लाई जलदाय विभाग द्वारा की जा रही है। तीन और चार दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई होने से अजमेर जिले में त्राहि-त्राहि मची हुई है। गर्मी के दिनों में वैसे ही पानी की मांग बढ़ जाती है, उस पर चार दिन के लिए पानी एकत्रित करना बहुत मुश्किल होता है। तीन और चार दिन में एक बार पानी की सप्लाई होने के कारण आम नागरिकों को अजमेर में पानी रखने के लिए कई उपाय करने होते हैं । नागरिकों को चार दिन पहले प्राप्त हुए पानी को ही पीने को मजबूर होना पड़ता है।
 जयपुर और अजमेर में पेयजल वितरण में हो रहे भेदभाव की ओर राज्य सरकार का कई बार ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन जयपुर प्रदेश की राजधानी होने के कारण सरकार ने आजतक भी संवधिान के अनुरूप पेयजल का समान वितरण नहीं करवाया। इतना ही नहीं कि राज्य के दूसरे बड़े शहर जोधपुर में भी रोजाना पेयजल का वितरण हो रहा है। चूंकि जोधपुर मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत का गृह जिला है इसलिए जलदाय विभाग जोधपुर में भी रोजाना पेयजल की सप्लाई करवाता है। जयपुर और जोधपुर में रोजाना तथा अजमेर में तीन एवं चार दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई होना सरासर भारतीय संविधान के नियमों का उल्लंघन है। यदि जयपुर के पानी के स्त्रोतों में इतना पानी है कि वहां रोजाना पेयजल की सप्लाई हो सकती है तो सरकार को समान अधिकार के अन्तर्गत अजमेर के नागरिकों को पेयजल की सप्लाई कम से कम दो दिन में एक बार करवानी चाहिए। इसके लिए जयपुर से पानी बीसलपुर बांध तक लाया जाए और फिर निर्धारित  प्रक्रिया के तहत बीसलपुर का पानी अजमेर लाया जाए। जयपुर से बीसलपुर बांध तक पानी लाने पर सरकार को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा क्योंकि पहले से ही पाइप लाइन बिछी हुई है। यदि जयपुर और अजमेर के नागरिकों को दो दिन में एक बार पानी की सप्लाई होगी तो नागरिकों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं रहेगा और न ही भारतीय संविधान में प्रदत्त समान अधिकार का उल्लंघन होगा। 
 राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्यन्यायाधीश से आग्रह है कि अजमेर जिले के नागरिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए जयपुर और अजमेर में पेयजल के वितरण में समानता करवाई जावें। भभक में लिखा यह समाचार भले ही उच्च न्यायालय के नियमों के मुताबिक याचिका के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है, लेकिन भभक ने एक जागरूक समाचार पत्र की भूमिका निभाते हुए आम जनता के हित में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उच्च न्यायालय के समक्ष रखा है। यदि उच्च न्यायालय भभक के इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करता है तो आम जनता का विश्वास  न्यायिक प्रणाली पर और बढ़ेगा। उच्च न्यायालय इस मामले में राज्य सरकार और सरकार के जलदाय एवं सिचाई विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी कर वस्तु स्थिति से अवगत हो सकता है। सरकार से यह भी पूछा जाना चाहिए कि वह अजमेर में चार दिन में एक बार और जयपुर तथा जोधपुर में रोजाना पेयजल की सप्लाई किस मापदण्ड के अनुरूप कर रही है। लोकतन्त्र के जो चार स्तंभ है उनमें न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जब-जब भी सरकार नागरिकों के साथ भेदभाव करती है तब-तब न्याय प्रणाली आवश्यक दिशा- निर्देश जारी करती है। चूंकि पेयजल के इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजस्थान की सरकार अजमेर के नागरिकों साथ सरासर भेदभाव कर रही है इसलिए उच्च न्यायालय का यह दायित्व बनता है कि भेदभाव को दूर करे और कानून के अन्तर्गत अजमेर एवं जयपुर के नागरिकों को पानी का वितरण समान रूप से करवावें।
  भवदीय
  एस.पी. मित्तल
  सम्पादक भभक
प्रकाश नगर, फाई सागर रोड़, अजमेर