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दम हो तो अजमेर
के नेता पानी पर सरकार को चेताएं
राज्य की वार्षिक योजना में अजमेर के विकास के लिए 59 करोड़ रूपये का
प्रावधान किए जाने की खबर से ही अजमेर के राजनेता खुश हैं । इसके लिए
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार प्रकट करने में नेताओं के बीच होड़
मची हुई है। जिन लोगों का राजनीति से वास्ता नहीं है वे भी दावा कर
रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने उन्हीं की सलाह पर अजमेर के विकास के लिए
राशि खर्च करने का प्रस्ताव किया है। अजमेर के ऐसे नेताओं की कितनी
चलती है, इसको जनता भली भान्ति जानती है। आज अहम सवाल भीषण गर्मी में
पेयजल की सप्लाई का है। यदि अजमेर के नेताओं में इतना ही दम है तो वे
पानी के मुद्दे पर सरकार को चेताएं। सब जानते हैं कि जयपुर और जोधपुर
में रोजाना पेयजल का वितरण किया जा रहा है, जबकि अजमेर में तीन-चार
दिन में एक बार बहुत थोड़ी मात्रा में पेयजल की सप्लाई हो रही है। जो
नेता मुख्यमंत्री को सलाह देने का दम भरते हैं, उन्हें यह चाहिए कि
वे अजमेर में भी जयपुर और जोधपुर की तरह पेयजल का वितरण करवावें।
इसके लिए मुख्यमंत्री पर दबाव डाला जाए। वार्षिक योजना में 59 करोड़
रूपये का जो प्रस्ताव किया गया है उसकी क्रियान्विति कब होगी इसका
अभी कोई पता नहीं है, लेकिन भीषण गर्मी में पेयजल की किल्लत से अजमेर
जिले में त्राहि-त्राहि मची हुई है। अजमेर के नेताओं को चाहिए कि
एकजुट होकर मुख्यमंत्री के समक्ष पेयजल की समस्या को रखे । इसे
अफसोसजनक ही कहा जाएगा कि एक ओर पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई
है और दूसरी ओर आनासागर झील के संरक्षण की घोषणा मात्र से ही अजमेर
के नेता मुख्यमंत्री का आभार प्रकट कर रहे हैं। इन नेताओं को यह
समझना चाहिए कि आनासागर झील तब ही अच्छी लगेगी, जब इसमें बरसात का
पानी एकत्रित होगा। जो नेता मुख्यमंत्री का आभार प्रकट कर रहे हैं,
असल में उन्हीं की करतूतों के कारण बरसाती नालों पर अतिक्रमण हुए हैं
। इतना ही नहीं गन्दे पानी के अनेक नाले आनासागर में गिरते हैं।
आनासागर का पानी आज मल-मूत्र युक्त हो गया है। नेताओं को मुख्यमंत्री
का आभार प्रकट करने के बजाए शुद्ध जल और मल-मूत्र में फर्क करना
चाहिए।
जहां तक अजमेर के विकास का सवाल है तो समय-समय पर करोड़ों रूपये खर्च
हुए हैं, लेकिन आज भी पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। कई
बार यह मांग उठी है कि कोटा से चंबल नदी का पानी अजमेर लाया जाए।
चंबल नदी का पानी आने से ही पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान होगा।
अजमेर के नेताओं ने चंबल नदी का पानी लाने के लिए कभी भी संयुक्त
प्रयास नहीं किए। इसके विपरीत बीसलपुर बांध का पानी जयपुर ले जाने की
योजना क्रियान्वित हो गई। अजमेर के नेताओं को शर्म आनी चाहिए कि
जयपुर में रोजाना पेयजल वितरण के लिए बीसलपुर बांध से पानी ले जाया
जा रहा है जबकि अजमेर में तीन-चार दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई हो
रही है। ऐसा नहीं कि जयपुर और अजमेर में पेयजल वितरण के भेदभाव को
अजमेर के नेता नहीं जानते, लेकिन अजमेर के किसी भी नेता इतनी हिम्मत
नहीं कि वे अजमेर व जयपुर में समान पेयजल वितरण की मांग मुख्यमंत्री
के समक्ष रख सकें। इसे अजमेर की जनता का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि
अजमेर के नेता राजनीतिक और मानसिक दृष्टि से बेहद कमजोर हैं ।
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