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  सीबीएसई की नवीं की परीक्षा मजाक बनी


 केन्द्रीय मानव संसाधन मन्त्री कपिल सिब्बल चाहते हैं कि विद्यार्थियों पर पढ़ाई का बोझ कम से कम हो और वे परीक्षा के दौरान तनाव की स्थिति में न रहे। इसीलिए सिब्बल ने सीबीएसई में दसवीं बोर्ड का प्रावधान खत्म कर दिया और इसी वर्ष से नवीं कक्षा की परीक्षाएं भी देशभर में एक समान करवायी। हड़बड़ी में लागू इस योजना का नतीजा यह निकला कि नवीं की परीक्षा मजाक बन गई। सीबीएसई ने देशभर के 11 हजार स्कूलों में जो प्रश्र्नपत्र भेजे, वे कई स्कूलों के मेल खा गए। चूंकि कपिल सिब्बल को बहुत जल्दी है इसलिए एक ही शहर में अलग अलग दिनों हुई नवीं की परीक्षा के प्रश्नपत्र एक ही रहे। देशभर में शिक्षा के लिए प्रसिद्ध अजमेर शहर में ऐसे कई उदाहरण प्रकाश में आए, जिसके अन्तर्गत नवीं के विद्यार्थियों का प्रश्नपत्र आउट हो गया। अजमेर शहर में अनेक स्कूल सीबीएसई से संबद्ध हैं । चूंकि इस बार सभी स्कूलों को नवीं की परीक्षा के प्रश्नपत्र सीडी के जरिए सीबीएसई से मिले इसलिए स्कूल के प्रबंधकों ने बिना दिमाग लगाए प्रश्नपत्रों की फोटोप्रति परीक्षार्थियों को वितरित करदी, लेकिन अनेक स्कूलों के विद्यार्थियों तब आpर्य हुआ, जब दो दिन पूर्व किसी अन्य स्कूल में हुआ प्रश्नपत्र मिल गया। इस बात को आसानी से इस तरह समझा जा सकता है कि अजमेर के ऑल सेंट स्कूल में गणित विषय की परीक्षा 26 फरवरी को ही हो गई। चूंकि देश में पहली बार सीबीएसई द्वारा निधाüरित प्रश्नपत्रों के आधार पर नवीं की परीक्षा हो रही थी इसलिए ऑल सेंट स्कूल की गणित की परीक्षा के बाद अन्य स्कूलों के नवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने ऑल सेंट स्कूल का गणित का पेपर विद्यार्थियों से लेकर तैयारी की। अजमेर में ऑल सैंट  स्कूल की परीक्षा के बाद सेंट एंसलम स्कूल के विद्यार्थियों ने 3 मार्च को गणित की परीक्षा दी। सीबीएसई का प्रश्र्नपत्र मिलते ही अनेक परिक्षार्थियों के चेहरे खिल उठे, क्योंकि 3 मार्च की परीक्षा का प्रश्र्नपत्र पूर्णरूप से वैसा ही था जैसा 26 फरवरी की परीक्षा का था।  सेन्ट एसलंम स्कूल के परीक्षार्थियों का प्रश्र्नपत्र आउट हो गया इसकी खबर स्थानीय दैनिक समाचार पत्रों में प्रमुखता के साथ प्रकाशित हो गई, लेकिन इसके बावजूद भी सीबीएसई के अधिकारियों ने प्रश्र्नपत्र आउट होने की कार्यवाही को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया, जबकि अजमेर में सीबीएसई का क्षेत्रीय मुख्यालय है और इसी मुख्यालय से राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात आदि के स्कूल जुड़े हुए हैं । चूंकि सीबीएसई के अधिकारियों ने हूबहु प्रश्र्नपत्रों को रोकने की कोई कार्यवाही नहीं की इसीलिए गणित की परीक्षा के बाद अनेक विषयों की  परीक्षाओं के प्रश्नपत्र आउट होते चले गए। यानि जिन स्कूलों में पहले परीक्षा हो गई, उसी के प्रश्र्नपत्र बाद की स्कूलों में होने वाली परीक्षाओं से मिल गए।  
 यह सही है कि देश की 11 हजार स्कूलों के लिए एक विषय के अलग-अलग प्रश्र्नपत्र बनान सम्भव नहीं, लेकिन सवाल उठता है कि सीबीएसई जिस प्रकार अब तक दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं देशभर में एक समान परीक्षा कार्यक्रम के तहत आयोजित कर रहा था तो उसी प्रकार नवीं की परीक्षाएं भी देशभर में समान परीक्षा कार्यक्रम के तहत क्यों नहीं करवायी गई? यदि देशभर में नवीं की परीक्षाएं एक टाइमटेबल के अन्तर्गत होती तो नवीं की परीक्षाएं मजाक नहीं बनती।
 यदि इस वर्ष नवीं की परीक्षाएं एक टाइमटेबल के तहत नहीं हो सकती थी तो फिर देशभर में इसी वर्ष से नई योजना को लागू नहीं किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं की सीबीएसई की यह बेवकूफी सिर्फ अजमेर ही हुई है। अजमेर तो छोटा शहर है, लेकिन दिल्ली, मुबई कोलकता, जैसे बड़े महानगरों में तो नवीं की परीक्षा की धçज्जयां ही उड़ गई। इससे तो अच्छा होता कि नवीं के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा ही पास की मार्कशीट देकर दसवीं में प्रवेश दे दिया जाता। पता नहीं केन्द्रीय मानव संसाधन मन्त्री कपिल सिब्बल को नवीं की परीक्षा मजाक बनने की जानकारी हुई या नहीं? लेकिन अभी तक भी कपिल सिब्बल का कोई बयान इस विवाद पर नहीं आया है। यह सही है कि कपिल सिब्बल के रौब के कारण मन्त्रालय के अधिकारी भी घबराते हैं। हो सकता है कि जानकारी होने के बाद भी अधिकारियों ने सिब्बल को हकीकत से अवगत नहीं कराया हो।
 लेकिन इस पूरे मामले में प्रधानमन्त्री डा. मनमोहन सिंह को हस्तक्षेप करना चाहिए। कपिल सिब्बल अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए कोई कार्यवाही करें या न करें, लेकिन प्रधानमन्त्री का यह दायित्व है कि देश के शिक्षा प्रणाली को मजाक न बनने दें। आज भारत के विद्यार्थी जिस कडे़ मापदण्ड से होकर गुजरता है, उससे अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश भी घबरा रहा है। ऐसा न हो शिक्षा प्रणाली में सुधार के नाम पर भारत के युवाओं की नींव ही कमजोर हो जाए। यदि सीबीएसई जैसी संस्था के विद्यार्थी आउट हुए प्रश्र्नपत्र के अनुरूप परीक्षा देंगे तो देश की शिक्षा प्रणाली की भटटा ही बैठ जाएगा। प्रधानमन्त्री डा. मनमोहन सिंह को सीबीएसई और केन्द्रीय मानव संसाधन मन्त्रालय के उन अधिकारियों के खिलाफ भी सत से सत कार्यवाही करनी चाहिए जिनकी वजह से एक ही शहर के स्कूलों में एक ही प्रश्र्नपत्र पर अलग अलग दिनों में नवीं की परीक्षा हुई।