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... तो सीपी जोशी बन गए शराब संस्कृति के नेता
क्रिकेट के तमाशे में अशोक गहलोत और सीपी जोशी आमने-सामने 
 वसुन्धरा राजे और ललित मोदी की दोस्ती को लेकर अशोक गहलोत अकसर यह आरोप लगाते रहे कि राजस्थान में शराब संस्कृति को बढ़ावा मिला है। अशोक गहलोत का अप्रत्यक्ष रूप से यह कहना रहा कि जो लोग ललित मोदी से दोस्ती रखते हैं, वे पांच सितारा होटलों में होने वाली ग्लैमर पार्टी के शौकीन होते हैं। इस बात का रोना अशोक गहलोत ने राजस्थान का दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद भी रोया। शायद यही कारण रहा कि उन्होंने जयपुर में हुए आईपीएल-तीन के क्रिकेट मैचों में पवेलियन में न तो शराब का वितरण होने दिया और न ही चीयर्स गल्र्स को अश्लील नृत्य करने दिया। इसके लिए मुख्यमंत्री ने बाकायदा जयपुर के कलेक्टर से आदेश जारी करवाए। चूंकि यह आदेश राज्य सरकार की ओर से जारी किए गए इसलिए मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत की छवि में और निखार होना ही था। सभी ने कहा कि अशोक गहलोत वाकई प्रदेश में शराब संस्कृति को बढ़ावा नहीं देना चाहते। गांधीजी के अनुयायी अशोक गहलोत ने एक बार फिर यह साबित किया कि वे एक साफ-सुथरी छवि वाले मुख्यमंत्री हैं, लेकिन यहां अहम सवाल यह है कि क्या केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राजमन्त्री सीपी जोशी प्रदेश में शराब संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं? सब जानते हैं कि जोशी इस समय राजस्थान क्रिकेट ऐसोसिएशन आरसीए के भी अध्यक्ष हैं। ऐसे में जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में आईपीएल के मैचों के समय जो कुछ भी होता है उसकी जिम्मेदारी आरसीए की होती है। आईपीएल के सभी मैच ललित मोदी की देखरेख में ही संपन्न हो रहे हैं। ललित मोदी आईपीएल के आयुक्त भी हैं । ललित मोदी को शराब संस्कृति से कोई परहेज नहीं है। आईपीएल के मैचों में कांग्रेस और भाजपा दोनों के नेता खुलेआम शामिल हो रहे हैं। ऐसे में सीपी जोशी भी कई मैचों में ललित मोदी के साथ नज़र आए हैं । जयपुर में आईपीएल तीन का पहला मैच सात अप्रैल को खेला गया, लेकिन इससे दो दिन पहले ही दिल्ली में ललित मोदी ने सीपी जोशी को आमन्त्रित कर लिया। अशोक गहलोत ने भले ही जयपुर में शराब संस्कृति पर रोक लगा दी हो, लेकिन दिल्ली में खेले जा रहे आईपीएल मैचों पर शराब संस्कृति पर वहां की मुख्यमंत्री
शीला दीक्षित ने रोक नहीं लगायी है। यानि आईपीएल के जिस मैच में शराब संस्कृति का बोलाबला रहा, उसमें सीपी जोशी ने सार्वजनिक तौर पर शिरकत की। सीपी जोशी ने दिल्ली के स्टेडियम में ललित मोदी से भी परहेज नहीं किया। ललित मोदी और सीपी जोशी कंधे से कंधा सटाकर बैठे।  अभी इस बात का पता नहीं चला है कि मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत ने जयपुर में आयोजित आईपीएल के मैचों में जो प्रतिबंध लगवाये हैं, उन पर आरसीए के अध्यक्ष सीपी जोशी की सहमति है या नहीं। जानकारों का मानना है कि क्रिकेट के तामशे को लेकर अशोक गहलोत और सीपी जोशी आमने-सामने हो गए हैं । यदि राजस्थान सरकार को आईपीएल के मैचों में अपनी छवि के अनुरूप प्रतिबंध लगाने ही थे तो इसकी घोषणा कलेक्टर के बजाए आरसीए के माध्यम से करवायी जाती। यदि सीपी जोशी को विश्वास में लिया जाता तो आरसीए के अध्यक्ष की हैसियत से सीपी जोशी भी आईपीएल के प्रबंधकों को यह निर्देश दे सकते थे कि जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में चीयर्स गल्र्स न तो नंगा नाच करेंगी और न ही मैच के दौरान मेहमानों को शराब परोसी जाएगी। यदि सीपी जोशी के माध्यम से इसकी घोषणा करवायी जाती तो जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की छवि अलग से नज़र नहीं आती। जो लोग अशोक गहलोत और सीपी जोशी में मतभेद नहीं होने का दावा करते हैं , उन्हें अब यह बताना चाहिए कि सीपी जोशी के नेतृत्व वाले आरसीए, ललित मोदी के नेतृत्व वाले आईपीएल और शिवचरण माली की अध्यक्षता वाली राज्य खेल परिषद में खींचतान क्यों हो रही है? क्या आरसीए और खेल परिषद एक दूसरे के सामने खड़े हैं? सब जानते हैं कि खेल परिषद के अध्यक्ष शिवचरण माली के अशोक गहलोत से कितने गहरे सम्बंध हैं।  जहां तक ललित मोदी का सवाल है तो उन्हें आरसीए और खेल परिषद की जंग में मजा आ रहा है। आज भले ही ललित मोदी आरसीए के अध्यक्ष न रहे हो , लेकिन राजस्थान में हो रहे खेल तमाशे में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। जो अशोक गहलोत शराब संस्कृति को पंसद नहीं करते हैं, उसी अशोक गहलोत की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को दिल्ली में शराब संस्कृति की पार्टी में बुला लिया जाता है। सवाल उठता है कि जब सीपी जोशी को दिल्ली में शराब संस्कृति की पार्टी से ऐतराज नहीं है तो फिर राजस्थान में उन्हें किस बात का ऐतराज होना चाहिए। यदि राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री नहीं होते तो आईपीएल के मैचों में जयपुर में भी चीयर्स गल्र्स नंगा नाच करतीं और स्टेडियम में मैच के दौरान शराब का वितरण किया जाता। इस पर आरसीए के अध्यक्ष की हैसियत से सीपी जोशी को भी ऐतराज नहीं होता। जो भी हो इस ताजा प्रकरण में अशोक गहलोत ने सीपी जोशी के मुकाबले यह साबित कर दिया है कि सत्ता में आने के बाद भी उनकी छवि खराब नहीं हुई है।